पार्किंसंस इलाज – लेवोडोपा और अन्य दवाइयां [Parkinson’s treatment in Hindi]

पार्किंसंस के इलाज के लिए कई दवाइयां उपलब्ध है, जिनमे से सबसे मुख्य दवाई है लेवोडोपा.

पर बाकी दवाइयां भी अपनी-अपनी तरह पार्किंसंस रोग का इलाज करने में मदत करती है.

आइये, पार्किंसंस रोग की दवाइयों के बारे में पढ़ते है.

1. लेवोडोपा

(जैसे कि Sinemet, Syndopa, Syndopa plus, Syndopa CR, Tidomet etc)

(जैसे कि सिनेमेट, सिंडोपा, सिंडोपा प्लस, सिंडोपा सीआर, टिडोमेट आदि)

पार्किंसंस रोग के लिए लेवोडोपा सबसे शक्तिशाली दवा है.

लेवोडोपा दिमाग के अंदर जाती है, और डोपामाइन में बदल जाती है! जैसा कि यहाँ बताया गया है, पार्किंसंस रोग में दिमाग  में डोपामाइन की कमी मुख्य समस्या है. तो, लेवोडोपा इस समस्या का सीधे ईलाज करती है.

एक बार जब यह दिमाग में जाती है, तो लेवोडोपा डोपामाइन में बदल जाती है.

आम तौर पर, लेवोडोपा को खाली पेट लेना चाहिए. लेवोडोपा लेने से पहले और बाद में आपको कम से कम 30 मिनट (और यदि हो सके तो एक घंटे) तक कुछ नहीं खाना चाहिए. यह शरीर में इसे सोखने में मदद करता है. टैबलेट को घुलने में मदद करने के लिए आपको प्रत्येक खुराक के साथ एक गिलास पानी पीना चाहिए.

कुछ रोगी लेवोडोपा लेने पर उल्टी आने की शिकायत करते हैं.

आमतौर पर लेवोडोपा को खाली पेट लेना चाहिए. खाने के साथ लेने से यह शरीर द्वारा ठीक से सोखी नहीं जाती.

लेवोडोपा खली पेट लेने से उसका असर बढ़ता है.

लेकिन अगर उल्टी बहुत ज्यादा है, तो रोटी या ब्रेड के एक छोटे से टुकड़े के साथ लेवोडोपा ली जा सकती है. आमतौर पर, आपके डॉक्टर इस समस्या के लिए डोमपेरिडॉन जैसी दवाएं लिख सकते हैं.

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 2. एंटाकैपोन (लेवोडोपा का दोस्त)

(जैसे कि Syncapone, Entacom plus)

(जैसे कि सिनकैपोन, एंटाकॉम प्लस)

ये दवा COMT नामक एंजाइम को रोक कर लेवोडोपा के टूटने को रोकती है. टोलकैपोन और एंटाकॉम लेवोडोपा की रक्षा करते हैं. वे सीधे लेवोडोपा के असर को बढ़ाते हैं.

टोलकैपोन, एंटाकैपोन की तुलना में अधिक प्रभावी है. लेकिन टोलकैपोन से यकृत को काफी नुक्सान हो सकता है, और इसलिए इसे बहुत सावधानी से इस्तेमाल करने की जरुरत है.

3. अमंताडाइन (लेवोडोपा का दोस्त)

(jaise ke Amantrel, Parkitidin)

(जैसे कि अमंत्रेल, पार्किटिडीन)

पार्किंसंस रोग के कुछ रोगियों को कुछ वर्षों के ईलाज के बाद हाथ, पैर और गर्दन में दर्द होने लगता है.

ये कपकपी, डांस जैसी हरकतें हैं, जो माइकल जैक्सन के मंच पर नाचने के तरीके से मिलती-जुलती हैं. नाचने के लिए लैटिन शब्द कोरिया है, और इसलिए इस कपकपी को कोरिय-फॉर्म (नाच-जैसी) कपकपी कहा जाता है. चूँकि यह शब्द बहुत कठिन है, इसलिए इसे “डिस्केनेसिया” भी कहा जाता है.

इस कपकपी को अक्सर लेवोडोपा से जोड़ा जाता है. यह लेवोडोपा लेने के 30 मिनट से 1 घंटे के बीच सबसे ज्यादा होती है.

डिस्केनेसिया डांस जैसी कपकपी है.

अमंताडाइन बहुत अच्छा असर करती है – यह इस तरह की कपकपी को काफी कम कर देती है. जो  रोगी इस कपकपी के कारण जरुरी लेवोडोपा नहीं ले पाते हैं, यह इसकी मदद से जितनी जरुरत हो उतनी लेवोडोपा ले सकते हैं, ताकि उनकी जिन्दगी  बेहतर हो सके.

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4. डोपामाइन एगोनिस्ट: प्रैमिपेक्सोल, रोपिरिनोल

(जैसे कि Pramipex, Pramipex ER, Ropark, Ropark XL)

(जैसे कि प्रमिपेक्स, प्रमिपेक्स ईआर, रोपार्क, रोपार्क एक्सएल)

ये डोपामाइन की तरह ही दिखते हैं. ये खुद को उन्हीं जगहों से जोड़ते हैं जहाँ आमतौर पर डोपामाइन जुड़ती है. इसलिए, ये दिमाग में डोपामाइन के जैसा ही असर पैदा करते हैं और पार्किंसंस रोग के लक्षणों से राहत देते हैं.

इसे बहुत अधिक खुराक में देने पर कुछ समस्यायें आ जाती हैं, जैसे कि दिन में बहुत नींद आना, आपा खो देना जैसे कभी कभी जुआ खेलने की लत और अच्छी नींद न आना और दिमाग का सही काम न करना जैसी परेशानियाँ पैदा हो सकती हैं. विशेष रूप से, दिन के दौरान बहुत ज्यादा नींद आने के कारण इसका इस्तेमाल कम करना पड़ता है – इस कारण इसे आप अधिक मात्रा में नहीं ले सकते.

 

5. MAO-B रोकने वाली: रसगिलिन और सेसिलीन

(जैसे कि Rasalect, Jumax, Selgin)

(जैसे कि रासलेक्ट, जुमेक्स, सेल्गिन)

ये दवाएं MAO नामक एक एंजाइम को रोकती हैं, जो डोपामाइन के खत्म होने को रोकता है और शरीर में इसे लंबे समय तक बनाए रखता है.

MAO-B रोकने वाला बुरा असर पैदा कर सकते हैं. ये कई दवाओं के साथ रिएक्शन भी कर सकते हैं. इसलिए, मैं उन्हें बहुत सोच समझकर इस्तेमाल करता हूं, अगर इसकी जरुरत हो तो ही.


पार्किंसंस की पूरी जानकारी: एक-एक कर के पढ़े

१. Tremors Meaning in Hindi [ हाथ-पांव की कंपन का मतलब और कारण! ]
२. Parkinson's Meaning in Hindi [ पार्किंसंस रोग के लक्षण और अर्थ ]
३. Parkinson’s treatment in Hindi [पार्किंसंस इलाज – लेवोडोपा और अन्य दवाइया]
४. डीप ब्रेन स्टिमुलेशन हिंदी – पार्किंसंस का अनोखा उपचार (DBS)
५. इन दवाइयों से दूर रहे !!!
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चेतावनी:
यह जानकारी केवल शिक्षण के लिए है. निदान और दवाई देना दोनों के लिए उचित डॉक्टर से स्वयं मिले। उचित डॉक्टर से बात किये बिना आपकी दवाइयां ना ही बढ़ाये ना ही बंद करे!!


डॉ सिद्धार्थ खारकर

डॉ  सिद्धार्थ खारकर न्यूरोलॉजिस्ट, मिर्गी  (एपिलेप्सी) विशेषज्ञ और पार्किंसंस विशेषज्ञ है।

उन्होंने भारत, अमेरिका और इंग्लॅण्ड के सर्वोत्तम अस्पतालों में शिक्षण प्राप्त किया है।  विदेश में  कई साल काम करने के बाद, वह भारत लौटे ,औरअभी मुंबई महरारष्ट्र में बसे है।

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